रिश्तों की डोर

रश्मि उन लाखों लड़कियों की तरह है जो आज बेबाक, आज़ाद और खुले माहौल में रहना पसंद करती हैं और रहती भी हैं। पहले पढ़ाई के लिए कई साल घर से दूर रही और उसके बाद से नौकरी करते हुए भी घर से दूर रहती है। रश्मि के मम्मी-पापा ने कभी उसके निर्णयों में हस्तक्षेप … Continue reading रिश्तों की डोर

इमोसनल अत्याचार नहीं….प्यार…

शायद इस पोस्ट को कुछ दिन पहले ही आ जाना चाहिए था...अब इसका विषय ही कुछ ऐसा है... नहीं नहीं, मैं गलत हूँ... इस पोस्ट का विषय ऐसा है जो हर मौसम, हर परिस्थिति और हर जगह पर चर्चा का विषय है.. और चूँकि मैं अपने बड़े भाई की शादी में व्यस्त था, इसलिए वो … Continue reading इमोसनल अत्याचार नहीं….प्यार…

संस्कृति ? या सिर्फ़ मजाक ?

अभी अभी ऑडी हो कर आ रहा हूँ...बस यूँ ही चल पड़ा था... देखने कि कैसी तैयारियां चल रही हैं ... कल संस्थापक दिवस पर होने वाले वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम की...अब साहब यूँ समझ लीजिये की कुछ छुपे हुए कलाकार [कलाकार ?? जाने भी दो ...] अपने आपको किसी तरह उस बिल से निकालने की … Continue reading संस्कृति ? या सिर्फ़ मजाक ?

A Young India, A Rising India

इस पोस्ट को केवल वही लोग पढ़ें जो उम्र से नहीं पर दिल से जवान है - एक जवान भारत को बुजुर्गियत का चोगा अब उतारना होगा !!! जवानी सर पर है और इसमें केवल जवान दिल और मन का ही प्रवेश है !!! बाकी सबको प्रवेश वर्जित है !!! क्या सब सो रहे हैं … Continue reading A Young India, A Rising India

जहाँ लोग ये, वहां हम वो

उफ्फ आखिरकार मैं खुली हवा में फ़िर से साँस ले रहा हूँ...लेकिन खुश होने की इतनी ज़्यादा बात नहीं है, 2 दिन बाद फ़िर से कुछ दिनों के लिए ब्लैक-आउट हो जाएगा | खैर आप तो जाने ही दीजिये इन सब फिजूल की बातों को....खुशी की बात यह है कि आज बहुत दिनों बाद ब्लॉग … Continue reading जहाँ लोग ये, वहां हम वो

घर से दूर, मंजिल के पास – हम बिट्सियन

यह पोस्ट उन सभी लोगों के लिए हैं जो इस त्यौहार के माहौल में अपने और अपने रिश्तेदारों से दूर हैं | मैं भी घर से दूर हूँ लेकिन आज बिट्स के पूजा मैदान में जा कर पुरानी यादें फ़िर से ताज़ा हो गईं |फ़िर से वो श्रद्धा के साथ माँ भवानी के सामने नतमस्तक … Continue reading घर से दूर, मंजिल के पास – हम बिट्सियन

घर से गोवा

घर से 18 तारीख को कलकत्ता के लिए रवाना हुआ और 19 को अपने चचेरे भाई के साथ कलकत्ता घूमने गया..रात को 11:30 की ट्रेन पकड़नी थी..मुझे बस यही पता था की गूंजन और श्रेणिक ही मेरे साथ हैं...पर जब स्टेशन पहुँचा तो जय से भी मुलाक़ात हो गई और अब हम 3 से 4 … Continue reading घर से गोवा

वो पहली बार…

आज पहली बार ब्लॉगिंग में अपने हाथ आजमा रहा हूँ..काफ़ी लोगों के ब्लॉग्स पढ़े..काफ़ी अच्छा लगा..मुझे नहीं पता की मैं आगे क्या और कब ब्लॉग करूँगा...दरअसल बिट्स में कुछ भी स्थाई नहीं है..बोले तो कुछ भी fix नहीं है...tests कभी भी..programs कभी भी...matches कभी भी...classes कभी भी..मैंने कई बार अपने काम के लिए प्लानिंग की … Continue reading वो पहली बार…