यात्रा – एक संगीतमय कहानी

"यात्रा - स्वयं को ढूँढने की" स्वर - पेटीवादक कहानी - पेटीवादक/पियूष नागपाल गिटार - यश शर्मा/पियूष नागपाल "YATRA - A JOURNEY OF SELF DISCOVERY" Story: Petivaadak & Piyush Nagpal Vocals: Petivaadak Guitar: Piyush Nagpal & Yash Shharma

ऐ माँ, मोहे क्षमा कर दीजे

समाज में बढ़ते दिवसों के चलन पर आधारित यह व्यंग्य उन बिन्दुओं को छूता है जो अनजाने में हमारा हिस्सा बन रहे हैं पर असल में उनका हमारे जीवन पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं है।

रिसता यौवन

कब इस शांत-लहर-डर मन में उद्वेलित सुनामी जागेगी?इस घुटते मरते यौवन में कब चिंगारी सी भागेगी?काला अँधा सा ये जीवन, कैसा है यह बिका बिका?क्यों हर चेहरा मुरझाया सा, क्यों है हर तन थका थका?कब दौड़ेगी लाल लहू में, इक आग यूँ ही बैरागी सी?स्फूर्ति-समर्पण-सम्मान सघन सी, निश्छल यूँ अनुरागी सीकब इस शांत-लहर-डर मन में...आँखें … Continue reading रिसता यौवन

दो दिन ज़िन्दगी के

याद है वो कहावत, "चार दिन की है ये ज़िन्दगी.."? याद तो होगा ही, पर मुझे लगता है कि समय आ गया है इस कहावत को बदलने का। अब क्या कहें, समय और समाज में जो बदलाव आये हैं उसमें तो ये बदली हुई पंक्तियाँ ही सटीक लग रही हैं "दो दिन ज़िन्दगी के.."कितनी आसान … Continue reading दो दिन ज़िन्दगी के

खामोश राहें

कितनी खूबसूरत अनुभूति है ये खामोशी। दिन-ब-दिन बढ़ते शोरगुल और मचलती दुनिया में खामोशी अपना एक अलग स्थान रखती है। ये केवल मैं ही नहीं, दुनिया के तमाम लोग समझते होंगे जब अपने आसपास एक सन्नाटा पसर जाता है तो कैसे हम अपने में खो जाते हैं। जब कई दिनों तक ज़िन्दगी की उधेड़बुन में … Continue reading खामोश राहें

रिश्तों की डोर

रश्मि उन लाखों लड़कियों की तरह है जो आज बेबाक, आज़ाद और खुले माहौल में रहना पसंद करती हैं और रहती भी हैं। पहले पढ़ाई के लिए कई साल घर से दूर रही और उसके बाद से नौकरी करते हुए भी घर से दूर रहती है। रश्मि के मम्मी-पापा ने कभी उसके निर्णयों में हस्तक्षेप … Continue reading रिश्तों की डोर

सुनो, अरे सुनो!

साभार: गूगलराहुल मेरी-आपकी तरह एक आम आदमी, नौकरी करता है, घर आता है, घर चलाता है और फिर अगले दिन शुरू हो जाता है. अपने पितृगाँव से दूर है पर घर पर सब खुश हैं कि लड़का अपना अच्छा ओढ़-बिछा रहा है और घर की गाड़ी चला रहा है. अभी राहुल की शादी नहीं हुई … Continue reading सुनो, अरे सुनो!