कुछ अपने मन की

वो महफ़िल में आये,और दिल-ए-महफ़िल को चुरा ले गए..आलम ऐसा हुआ इस महफ़िल का,हम पानी को शराब समझकर पी गए...हम निकले थे ज़माने को अपना बनाने..हम निकले थे ज़माने को अपना बनाने..पर पूरी कायनात में कोई बेगाना ही ना मिला...इन हसीनों के भंवर में ना पड़ बन्दे,तू हो जाएगा कंगार..फिर याद आएगा, पी.एम. ने कहा … Continue reading कुछ अपने मन की