ठीक साल भर बाद इसी दिन एक और पोस्ट..पता नहीं इस दिन क्यों लिखना चाहता हूँ पर चाहता हूँ इसीलिए लिख रहा हूँ..पर इस बार कुछ अलग.. बदलाव आवश्यक है और निरंतर है.. एक साल में मैं भी बदला हूँ, दुनिया भी..बिट्स में भी बदलाव आ रहा है.. आशा है अच्छे के लिए ही आये..पर … Continue reading एक महत्त्वपूर्ण संकल्प
आपत्ति
ऋषि फ़ोन पर बात कर रहा था, अपनी गर्लफ्रेंड, प्रीती से..प्रीती उसे कह रही थी कि वो सुबह जल्दी उठा करे और इसके फायदे और निशाचर होने के नुक्सान बता रही थी..ऋषि पूरे तन्मयता के साथ सुन रहा था.. आधे घंटे तक सुना..उनके इस रिश्ते के बारे में ऋषि की माँ को पता था और … Continue reading आपत्ति
व्यापार बढ़ ही रहा है..लोग बन ही रहे हैं !!
कुछ लिखने कि इच्छा तो नहीं थी पर फिर सोचा अच्छा दिन है.. लिखना चाहिए..लिख इसलिए नहीं रहा हूँ कि आज वैलेनटाइन्स डे है... बस कुछ सोच को शब्दों का रूप देने के लिए लिख रहा हूँ..कुछ लोग एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं.. इस तरह - स्वतंत्र दिवस मुबारक हो.. अर्थात अकेले हो, … Continue reading व्यापार बढ़ ही रहा है..लोग बन ही रहे हैं !!
ओ साथी रे
अभी लिखने की इच्छा नहीं है.. अभी बेरोजगार हूँ तो ये आलम है.. जब रोज़गार पा जाऊंगा तो पता नहीं कैसे लिखूंगा..खैर इस पोस्ट में केवल एक गाना पोस्ट कर रहा हूँ.. पसंद आये तो बताइयेगा..गाना यहाँ से सुनिए : ओ साथी रे (प्रतीक माहेश्वरी)बोल यहाँ पर देखें : ओ साथी रे (मुक़द्दर का सिकंदर)आदाबआपकी … Continue reading ओ साथी रे
जैसे को तैसा..
आज कुछ पढ़ रहा था अंतरजाल पर.. बहुत ही अच्छी कहानी.. कुछ कुछ सच भी.. तो सोचा कि आप सभी के साथ बाटूँ..कहानी कुछ ऐसी थी:एक बुज़ुर्ग अपने बेटे के यहाँ रहने गया, विलायत...बेटे की शादी हो चुकी थी और बेटा भी था, ४ साल का..बुज़ुर्ग पर उम्र काफी हावी हो चुकी थी.. नज़र कमज़ोर … Continue reading जैसे को तैसा..
मुझे नौकरी चाहिए..
कैम्पस पर वापस आ कर घर जैसा लग रहा है.. जहाँ किसी बात की कोई चिंता नहीं है.. जब मन करे सो जाओ.. और जब मन करे, उठो..खाना खाया? कोई पूछने वाला नहीं.. नहाया? कोई पूछने वाला नहीं.. और ना ही पूछने वाली :)यहाँ से दूर रहकर ज़िन्दगी कैसी होती है.. इसका अंदाज़ा तो हो … Continue reading मुझे नौकरी चाहिए..
अँधा कौन ?
बचपन उस अंधे को देखकर यौवन हो गया था...जब अंकुर अपनी माँ के साथ मंदिर से बाहर आता तो उसे देख कर विस्मित हो जाता.. उसे दुःख होता...एक दिन वह अपने दुःख का निवारण करने उस अंधे के पास पहुंचा..पहुंचा और बोला - "बाबा, अँधा होने का आपको कोई गम है?"अँधा बोला - "बेटा, यह … Continue reading अँधा कौन ?
लडकियां बनाम समाज
बस खचाखच भरी थी और लोग जैसे तैसे अपने से ज्यादा अपने जेबों को संभाल रहे थे..तभी निशा बस में चढ़ी क्योंकि उसे दूसरे बस के जल्दी आने की उम्मीद नहीं थी..एक नवयुवक ने नवयुवती को देखा तो झट खड़ा होने को आया.. और कहा - "आप बैठिये, मैं खड़ा हो जाता हूँ |"निशा ने … Continue reading लडकियां बनाम समाज
कुछ अपने मन की
वो महफ़िल में आये,और दिल-ए-महफ़िल को चुरा ले गए..आलम ऐसा हुआ इस महफ़िल का,हम पानी को शराब समझकर पी गए...हम निकले थे ज़माने को अपना बनाने..हम निकले थे ज़माने को अपना बनाने..पर पूरी कायनात में कोई बेगाना ही ना मिला...इन हसीनों के भंवर में ना पड़ बन्दे,तू हो जाएगा कंगार..फिर याद आएगा, पी.एम. ने कहा … Continue reading कुछ अपने मन की
घूसखोर भगवान
हमारी आदत ही हो गयी है.. जो नेता दिखे - घूसखोर है.. जो पुलिस वाला दिखा - घूसखोर है... जो सरकारी कर्मचारी दिखे - घूसखोर है..माना की इन सब मामलों में हमारे तुक्के सत-प्रतिशत सही बैठते हैं.. पर कुछ दिनों पहले दुनिया का सबसे बड़ा घूसखोर खोजा मैंने..हुआ यूँ की एक मंदिर गया था दोस्त … Continue reading घूसखोर भगवान