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ब्लॉगिंग के १० वर्ष – ये कहाँ आ गए हम

कल ही की तो बात थी जब अपने कॉलेज के एक छोटे से कमरे में बैठे, गरमाती लू के चक्कर में किंवाड़ को खुला रखे, अध्-टूटी खिड़कियों से सरसराती गर्म-ठंडी हवा, खट-खट कर चलते पंखे और अपनी पूरी लौ के साथ जलते उस ट्यूबलाइट के तले ये सफ़र शुरू हुआ था।

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या देवी सर्व भूतेषु!

आपका ब्लॉग कई वर्ष पहले पढ़ता था किन्तु फिर छूट गया। पुनः पढ़ना शुरू कर रहा हूँ। मुख्यतः आपके लेखों से अपने शब्दकोष को बढ़ाने का प्रयास रहेगा और दूसरा आपके गहन विचारों को समझने का।

आभार

Gulabkothari's Blog

‘या देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्ये, नमस्तस्ये, नमस्तस्ये नमो नम: ॥’

हे दुर्गे! हे प्रकृते! तेरे तीनों गुण- सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण क्रमश: सुख, दु:ख और मोह स्वभाव वाले हैं। प्रकाशक, प्रवर्तक एवं नियामक भी हैं। सत्वगुण का कार्य प्रकाश (प्रकट) करना, रजोगुण का कार्य प्रवर्तन करना तथा तमोगुण नियमन कर्ता है। तेरी शक्ति से ही शिव भिन्न-भिन्न रूप में विश्व बनता है। तेरे से बाहर विश्व में चेतन-अचेतन कुछ नहीं है।

हे शकेृ! आजादी के समय देश ने कुछ सपने देखे थे। राष्ट्र का संचालन हमारे चिन्तन और संस्कृति के अनुकूल होगा। इसी के अनुरूप ज्ञान की धारा बहेगी। कोई गरीब नहीं रहेगा। किसी का शोषण नहीं होगा। मेहनती, चरित्रवान और बुद्धिप्रधान युवा शक्ति देश का नेतृत्व करेगी। आज वह बेरोजगार घूम रही है। राष्ट्र का एकता और अखण्डता का सपना पूरा होगा। आज तो धर्म, जाति, सम्प्रदाय, क्षेत्र, भाषा जैसे असुर इस यज्ञ को भ्रष्ट कर रहे…

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बवाली लोग

"अरे भूकंप आया, भूकंप आया, भागो भागो, जान बचाओ" बस इतना सुनना था कि कमरे में बैठे दसों लोग हाथ उठाकर भागे पर जैसे ही आँगन में आये तो समझ आया कि बगल वाले अवैध घर को गिराने के लिए क्रेन कार्य पर लगा हुआ है और यही कारण है कि थोड़ा इनका घर भी … Continue reading बवाली लोग

हाय री हिन्दी!

हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य पर सरकार ने जो बड़े-बड़े परदे छपवाए थे, उनमें भी अंक सारे अंग्रेजी में ही थे। कैसी विडम्बना है कि हिन्दी दिवस मनाते वक़्त भी वो अंग्रेजी अंकों (और शब्दों) का प्रयोग कर रहे थे।

BITS Trunk – यादों का पिटारा

BITSians' Day is back, and back are those hazy memories which do not get place in our chitchats whenever I meet my BITSian friend(s) because many more prominent memories take up the lions share and surprisingly push back these long gone memories back, even further. Few days ago, I was just remembering the days when … Continue reading BITS Trunk – यादों का पिटारा

ऐ माँ, मोहे क्षमा कर दीजे

समाज में बढ़ते दिवसों के चलन पर आधारित यह व्यंग्य उन बिन्दुओं को छूता है जो अनजाने में हमारा हिस्सा बन रहे हैं पर असल में उनका हमारे जीवन पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं है।