फिर से आ टपका हूँ मैं ब्लॉग-जहां में.. किसलिए?अरे बस ये मत पूछिए.. बस यूँ समझिये की इधर से गुज़र रहा था तो सोचा की आप सबको साष्टांग प्रणाम करता चलूँ.. आशीर्वाद दिए बगैर भागिएगा मत यहाँ से..बहुत दिनों से सोच रहा था कि क्या लिखूं? क्या लिखूं? कुछ पल्ले नहीं पढ़ रहा है.. तो … Continue reading बक-बक
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मौत से ज़िन्दगी
मनोज, एक सीधा-साधा मेहनती इंसान... कॉलेज से प्रथम श्रेणी में स्नातक और फिलहाल नौकरी पेशा..घर पर माँ, एक छोटा भाई और एक छोटी बहन का पूरा बोझ उसके ऊपर..प्रथम श्रेणी से पास होने के बावजूद एक मामूली नौकरी मिली थी बड़े शहर में.. कुछ से अपना गुज़ारा चलाता और बाकी घर पर भेजता..बहन की शादी … Continue reading मौत से ज़िन्दगी
तेरे-मेरे बीच
हिन्दी दिवस फिर से आया है आज.. मैंने सोचा कि इस हिन्दी दिवस पे कुछ नया किया जाए.. जो पहले कभी नहीं किया हो... अपने पोस्ट "तीन साल ब्लॉगिंग के" में मैंने लिखा था कि श्रृंगार रस को छोड़कर हर रस का आनंद लिया है मैंने अपनी लेखनी में.. तो इस बार हिन्दी दिवस पर … Continue reading तेरे-मेरे बीच
कुत्ते की मौत
बहुत दिन हो गए नीचे वाली चंद पंक्तियों को.. मैं स्वतंत्रता दिवस का इन्तज़ार तो नहीं कर रहा था पर परिस्थितियों ने इस पोस्ट के लिए इसी दिन को मुनासिब समझा है.. क्या किसी को याद भी है कि आज से कुछ १ महीने पहले मुंबई में बम-ब्लास्ट्स हुए थे? शायद नहीं.. सबको हिना रब्बानी … Continue reading कुत्ते की मौत
परवरिश
संगीत के क्षेत्र में गुरूजी ने बहुत नाम कमाया था.. कई देशों और महफ़िलों की शान रह चुके थे वो..अब उनकी तमन्ना थी की उनकी दोनों बेटियाँ भी संगीत के क्षेत्र में उनकी तरह नाम करे और समाज और देश का भी सर ऊँचा करे..अच्छे ख्यालों से उन्होंने दोनों बेटियों को संगीत की शिक्षा-दिक्षा देनी … Continue reading परवरिश
सुख-दुःख के साथी
कॉलेज खत्म होने में बस कुछ ही दिन बाकी थे.. और हर किसी कि तरह सबको ये गम सता रहा था कि अब पता नहीं कब मुलाक़ात हो...और सही भी था.. एक शहर में रहकर मिलना मुश्किल हो जाता है तो दूसरे-दूसरे शहरों में रहने वालों कि तो बात ही क्या..राहुल और मोहित काफी अच्छे … Continue reading सुख-दुःख के साथी
तीन साल ब्लॉगिंग के
आज ब्लॉग ३ साल का हो गया है... कुछ मेरी और ज्यादा आपकी बदौलत..३ साल काफी लंबा समय होता है और तीन साल में काफी कुछ बदल गया है और काफी कुछ आज भी वैसा का वैसा ही है..मेरी सोच, मेरे देखने, मेरे समझने, मेरे परखने का तरीका बदला है... ३ साल पहले मैं छात्र … Continue reading तीन साल ब्लॉगिंग के
पढ़े-लिखे अशिक्षित
२ दिन बाद होली होने के कारण मेट्रो में काफी भीड़ थी.. लोग अपने-अपने घर पहुँचने की जल्दी में थे और शुक्रवार होने के कारण भीड़ कुछ ज्यादा ही हो गयी थी.. मैं भी अपने घर जाने के लिए मेट्रो में चढ़ा हुआ था और मेट्रो की हालत ऐसी कि तिनका रखने तक की जगह … Continue reading पढ़े-लिखे अशिक्षित
चलती दुनिया
उसकी अपने-आस पड़ोस और दोस्तों से बहुत बनती थी..वह सबको खूब प्यार देता और बदले में लोग भी उसे उतना ही सम्मान और प्यार देते..जिंदगी बहुत ही खूबसूरत और पूर्ण लग रही थी..धीरे-धीरे वह अपने शहर, राज्य, देश और दुनिया में भी बहुत लोकप्रिय हुआ..वह लोगों के दिल की धड़कन बन गया था और बहुत … Continue reading चलती दुनिया
जियो जी!
काम, काम सब कर रहे हैं। सब व्यस्त हैं, दुखी हैं पर सब फिर भी काम कर रहे हैं।कोई कहता है शौक बड़ी चीज़ है, हम कहते हैं काम बड़ी चीज़ है।शौक से घर थोड़े न चलता है, काम से चलता है।शौकवाले होगे तो अच्छी स्त्री नहीं मिलेगी पर कामवाले होगे तो अच्छी स्त्री आपको … Continue reading जियो जी!