वो निःशब्द, निस्तब्ध खड़ी रही, हम हँसते रहे, फंदे कसते रहे, वो निर्लज्ज कर्ज में डूबती रही, हम उड़ती ख़बरों को उड़ाते रहे, वो रोती रही, सिसकती रही, हम बेजान खिलौनों से चहकते रहे, वो चीखती रही, चिल्लाती रही, हम अपने जश्न में उस आवाज़ को दबाते रहे, वो डरती रही, बिकती रही, हम … Continue reading आत्महत्या
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एक लम्हां
सुधीर और सलोनी एक ही कॉलेज से पढ़े थे और एक दूसरे को कॉलेज के दिनों से जानते थे..पसंद एक दूसरे को दोनों करते थे पर कभी इज़हार नहीं किया.. एक दूसरे के बोलने का इन्तज़ार करते रहे.. एक बार सलोनी किसी व्यावसायिक यात्रा पर सुधीर के शहर आई तो दोनों ने मिलने का कार्यक्रम … Continue reading एक लम्हां
रजनी चालीसा
आज कल रजनीकांत सर पर बहुत सारे एस.एम.एस और दो लाईना बन रहे हैं.. भैया अब वो हैं ही ऐसे कमाल के..६१ साल में ऐसे-ऐसे कारनामे अपनी फिल्मों में जो करते हैं.. नव-कलाकारों की तो सिट्टीयां और पिट्टीयां सब गुम हो गई हैं.. रजनीकांत सर ने जितनी मेहनत और निष्ठां से फ़िल्मी जगत को एक … Continue reading रजनी चालीसा
अनमोल अजन्मी कन्याएं
भोला भागता हुआ कमरे में घुसा और साँसों ही साँसों में एक वज्र मार गया.."बाबा, जायदाद के लिए फिर से हाथापाई हो गयी और गौतम ने जीतू भैया को गोली मार दी!!"इतना सुनना था कि बाबा और माँ पवन की वेग से गाड़ी में चढ़ कर जीतू के घर पहुंचे..वहां अफरा-तफरी मची हुई थी और … Continue reading अनमोल अजन्मी कन्याएं
५०० रूपए
सुधीर और मोहन बहुत ही करीबी दोस्त थे... सर्वसम्पन्न तो दोनों के परिवार थे पर एक जगह जा कर दोनों की राहें अलग हो जाती थीं | दोनों एक ही कंपनी में कार्यरत थे और जैसा कि एक आम युवा-दिल होता है.. दोनों में काफी बहस छिड़ी रहती थी.. बालाओं को लेकर, परिवार को लेकर, … Continue reading ५०० रूपए
दर्द-निवारक
छोटा सौरव जब चलना सीख रहा था तो कभी-कभी गिर पड़ता, माँ झट उसे गोद में लेकर उसके दर्द को गायब कर देती...बचपन में जब चोट लगती थी तो सौरव भागा-भागा अपने माँ-बाप के पास आता था.. वो झट से उसका दर्द दूर कर देते...कम नंबर आने पर जब सौरव उदास हो जाता तो उसके … Continue reading दर्द-निवारक
बदलाव खुद से
साहिल और राहुल, अन्य किसी भी कॉलेज के छात्र की तरह कभी-कभी देश पर चर्चा करने लगते थे..दोनों बहुत कोसते थे इस देश के प्रणाली को.. इस देश के तंत्र को... कम ही मौके ऐसे आते थे जब वो दोनों देश के बारे में कुछ भी सकारात्मक कहते हों...एक दिन दोनों एक स्वयंसेवी संस्था में … Continue reading बदलाव खुद से
कन्नू की “गाय” ते माँ का “Cow”
काफी महीनों बाद लिख रहा हूँ..कारण २ हैं.. पहला अनुपलब्धि अंतरजाल की और दूसरा अनुपलब्धि अच्छे विषय की...पर आज दोनों ही बाधाएं दूर हो गयी हैं और इसलिए लिख रहा हूँ..यूँ तो मैं लघु कथाएं लिखने लगा था पर आज एक लघु कथा ऐसी लिखूंगा जो कि मनगढंत नहीं है अपितु मेरे ही सामने घटा … Continue reading कन्नू की “गाय” ते माँ का “Cow”
एक दृढ़ फैसला?
मोहित एक सर्वगुण और सम्पूर्ण परिवार का लाडला बेटा था | बड़ा भाई डॉक्टर बन गया था और बड़ी बहन भी अपनी पढ़ाई पूरी कर के अपने ससुराल जा चुकी थी | मोहित पिछले ५ सालों से बाहर ही था और अपनी पढ़ाई ख़त्म करके वो वापस घर आया था |मोहित में बदलाव ज़बरदस्त था … Continue reading एक दृढ़ फैसला?
सिर्फ एक बार !
काफी दिन हो गए कुछ लिखे हुए.. आपसे गुफ्तगू किये हुए.. काफी व्यस्त था नौकरी की खोज में और आखिर में मैं भी बाबू बन ही गया.. आप सभी की दुआ के लिए शुक्रिया..मैं कभी भी सोच कर नहीं लिखता हूँ.. कभी मेरे आस-पास कुछ होता है तो लिखता हूँ.. यूँ कहें कि लिखते-लिखते सोचता … Continue reading सिर्फ एक बार !